अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन – 2026
विषय: “हिंदी का वैश्विक परिप्रेक्ष्य: भाषा, साहित्य और डिजिटल युग की संभावनाएँ”
आयोजन तिथि: 13 सितम्बर, 2026
हिंदी आज केवल भारत की भाषा नहीं रही, बल्कि विश्व स्तर पर संचार, साहित्य, संस्कृति और ज्ञान-विनिमय का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनती जा रही है। डिजिटल तकनीक, अनुवाद, मीडिया और वैश्विक प्रवास के कारण हिंदी की पहुँच निरंतर बढ़ रही है।
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य हिंदी भाषा और साहित्य की वैश्विक भूमिका पर विचार-विमर्श करना, नए शोध को प्रोत्साहित करना तथा विभिन्न देशों के विद्वानों, शोधार्थियों और साहित्यकारों को एक साझा मंच प्रदान करना है।
सम्मेलन में हिंदी के वर्तमान स्वरूप, उसके भविष्य, तकनीकी विकास और अंतरराष्ट्रीय संदर्भों में उसकी प्रासंगिकता पर गंभीर चर्चा की जाएगी।
“हिंदी का वैश्विक परिप्रेक्ष्य: भाषा, साहित्य और डिजिटल युग की संभावनाएँ”
वैश्वीकरण और हिंदी भाषा का विकास
हिंदी साहित्य की समकालीन प्रवृत्तियाँ
हिंदी और डिजिटल मीडिया
हिंदी अनुवाद अध्ययन और विश्व साहित्य
प्रवासी साहित्य और हिंदी
शिक्षा, शोध और हिंदी का अंतरराष्ट्रीय विस्तार
हिंदी पत्रकारिता और जनसंचार माध्यम
नई पीढ़ी और हिंदी भाषा का भविष्य
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और हिंदी भाषा
भारतीय संस्कृति के प्रसार में हिंदी की भूमिका
हिंदी भाषा और साहित्य के अंतरराष्ट्रीय आयामों पर अकादमिक चर्चा को प्रोत्साहित करना
विश्व के विभिन्न देशों के विद्वानों और शोधार्थियों के बीच संवाद स्थापित करना
हिंदी के डिजिटल और तकनीकी विकास पर विचार करना
हिंदी के माध्यम से भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा के वैश्विक प्रसार को मजबूत करना
इस सम्मेलन में निम्नलिखित प्रतिभागियों को आमंत्रित किया जाता है:
विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक
शोधार्थी और विद्यार्थी
साहित्यकार एवं लेखक
भाषा विशेषज्ञ
अनुवादक
मीडिया एवं सांस्कृतिक अध्ययन के शोधकर्ता
आयोजक संस्था:
विद्या कुटीर फाउंडेशन
प्रकाशन सहयोगी:
विद्या कुटीर पब्लिकेशन्स
सम्मेलन में प्रस्तुत चयनित शोधपत्रों को समीक्षित (Peer-Reviewed) सम्मेलन कार्यवाही / पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाएगा।
सम्मेलन में भाग लेने के इच्छुक विद्वान, शोधार्थी एवं लेखक अपने मौलिक और अप्रकाशित शोधपत्र प्रस्तुत कर सकते हैं। शोधपत्र निम्नलिखित दिशानिर्देशों के अनुसार तैयार किए जाने चाहिए:
1. भाषा:
शोधपत्र हिंदी भाषा में होना चाहिए।
2. मौलिकता:
प्रस्तुत शोधपत्र पूर्णतः मौलिक तथा अप्रकाशित होना चाहिए। किसी अन्य सम्मेलन या पत्रिका में प्रकाशित या प्रस्तुत शोधपत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
3. शब्द सीमा:
शोधपत्र की शब्द सीमा लगभग 3000 से 5000 शब्दों के बीच होनी चाहिए।
4. फॉर्मेट:
फॉन्ट: Unicode (Mangal / Noto Sans Devanagari)
फॉन्ट आकार: 14 (शीर्षक), 12 (मुख्य पाठ)
लाइन स्पेसिंग: 1.5
मार्जिन: 1 इंच (चारों ओर)
5. सारांश (Abstract):
शोधपत्र के साथ लगभग 200–250 शब्दों का सारांश तथा 4–5 कीवर्ड अनिवार्य रूप से शामिल करें।
6. संदर्भ शैली:
संदर्भ और उद्धरण MLA / APA शैली में दिए जाने चाहिए।
7. प्रस्तुति प्रारूप:
शोधपत्र MS Word (.doc / .docx) फॉर्मेट में भेजा जाना चाहिए।
8. चयन प्रक्रिया:
प्राप्त शोधपत्रों का मूल्यांकन विशेषज्ञों द्वारा किया जाएगा। चयनित शोधपत्रों को सम्मेलन में प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा तथा उन्हें सम्मेलन प्रकाशन में प्रकाशित किया जाएगा।
सारांश जमा करने की अंतिम तिथि: 15 जुलाई 2026
सारांश स्वीकृति की सूचना: 25 जुलाई 2026
पूर्ण शोधपत्र जमा करने की अंतिम तिथि: 20 अगस्त 2026
सम्मेलन की तिथि: 13 सितम्बर 2026
सम्मेलन में भाग लेने के लिए सभी प्रतिभागियों को पूर्व पंजीकरण करना आवश्यक है।
पंजीकरण श्रेणियाँ:
शोधार्थी / विद्यार्थी: ₹1000
प्राध्यापक / अकादमिक / स्वतंत्र शोधकर्ता: ₹1200
अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी: $50
केवल श्रोता (Listener): ₹500
पंजीकरण शुल्क में शामिल सुविधाएँ:
सम्मेलन किट (Digital I Card)
सहभागिता प्रमाणपत्र
सम्मेलन में शोधपत्र प्रस्तुति का अवसर (स्वीकृत प्रतिभागियों के लिए)
चयनित शोधपत्रों का प्रकाशन
इच्छुक प्रतिभागी निर्धारित तिथि तक पंजीकरण फॉर्म भरें।
पंजीकरण शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करें।
भुगतान की रसीद और शोधपत्र ईमेल के माध्यम से भेजें।
(ईमेल और पंजीकरण लिंक सम्मेलन की आधिकारिक सूचना के साथ साझा किए जाएंगे।)
अधिक जानकारी, शोधपत्र जमा करने तथा पंजीकरण से संबंधित प्रश्नों के लिए कृपया संपर्क करें:
आयोजक संस्था:
विद्या कुटीर फाउंडेशन
प्रकाशन सहयोगी:
विद्या कुटीर पब्लिकेशन्स
हिंदी भाषा और साहित्य के वैश्विक विकास में योगदान देने के लिए आप सभी का इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हार्दिक स्वागत है।